Adhikarana 1 (1-2) · Śloka 2
অথাতঃ পাণ্ডুরোগপ্রতিষেধং ব্যাখ্যাস্যামঃ ||১|| যথোবাচ ভগবান্ ধন্বন্তরিঃ ||২||
View original
अथातः पाण्डुरोगप्रतिषेधं व्याख्यास्यामः ||१|| यथोवाच भगवान् धन्वन्तरिः ||२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 1 (1-2) · Śloka 2
অথাতঃ পাণ্ডুরোগপ্রতিষেধং ব্যাখ্যাস্যামঃ ||১|| যথোবাচ ভগবান্ ধন্বন্তরিঃ ||২||
अथातः पाण्डुरोगप्रतिषेधं व्याख्यास्यामः ||१|| यथोवाच भगवान् धन्वन्तरिः ||२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 2 (3) · Śloka 3
ব্যবাযমম্লং লবণানি মদ্যং মৃদং দিবাস্বপ্নমতীব তীক্ষ্ণম্ | নিষেবমাণস্য বিদূষ্য রক্তং কুর্বন্তি দোষাস্ত্বচি পাণ্ডুভাবম্ ||৩||
व्यवायमम्लं लवणानि मद्यं मृदं दिवास्वप्नमतीव तीक्ष्णम् | निषेवमाणस्य विदूष्य रक्तं कुर्वन्ति दोषास्त्वचि पाण्डुभावम् ||३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 3 (4) · Śloka 4
পাণ্ড্বামযোঽষ্টার্ধবিধঃ প্রদিষ্টঃ পৃথক্সমস্তৈর্যুগপচ্চ দোষৈঃ |৪|
पाण्ड्वामयोऽष्टार्धविधः प्रदिष्टः पृथक्समस्तैर्युगपच्च दोषैः |४|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 4 (4) · Śloka 4
সর্বেষু চৈতেষ্বিহ পাণ্ডুভাবো যতোঽধিকোঽতঃ খলু পাণ্ডুরোগঃ ||৪||
सर्वेषु चैतेष्विह पाण्डुभावो यतोऽधिकोऽतः खलु पाण्डुरोगः ||४||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 5 (5) · Śloka 5
ত্বক্স্ফোটনং ষ্ঠীবনগাত্রসাদৌ মৃদ্ভক্ষণং প্রেক্ষণকূটশোথঃ | বিণ্মূত্রপীতত্বমথাবিপাকো ভবিষ্যতস্তস্য পুরঃসরাণি ||৫||
त्वक्स्फोटनं ष्ठीवनगात्रसादौ मृद्भक्षणं प्रेक्षणकूटशोथः | विण्मूत्रपीतत्वमथाविपाको भविष्यतस्तस्य पुरःसराणि ||५||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 6 (6) · Śloka 6
স কামলাপানকিপাণ্ডুরোগঃ কুম্ভাহ্বযো লাঘর(ব)কোঽলসাখ্যঃ | বিভাষ্যতে লক্ষণমস্য কৃত্স্নং নিবোধ বক্ষ্যাম্যনুপূর্বশস্তত্ ||৬||
स कामलापानकिपाण्डुरोगः कुम्भाह्वयो लाघर(व)कोऽलसाख्यः | विभाष्यते लक्षणमस्य कृत्स्नं निबोध वक्ष्याम्यनुपूर्वशस्तत् ||६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 7 (7) · Śloka 7
কৃষ্ণেক্ষণং কৃষ্ণসিরাবনদ্ধং তদ্বর্ণবিণ্মূত্রনখাননং চ | বাতেন পাণ্ডুং মনুজং ব্যবস্যেদ্যুক্তং তথাঽন্যৈস্তদুপদ্রবৈশ্চ ||৭||
कृष्णेक्षणं कृष्णसिरावनद्धं तद्वर्णविण्मूत्रनखाननं च | वातेन पाण्डुं मनुजं व्यवस्येद्युक्तं तथाऽन्यैस्तदुपद्रवैश्च ||७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 8 (8) · Śloka 8
পীতেক্ষণং পীতসিরাবনদ্ধং তদ্বর্ণবিণ্মূত্রনখাননং চ | পিত্তেন পাণ্ডুং মনুজং ব্যবস্যেদ্যুক্তং তথাঽন্যৈস্তদুপদ্রবৈশ্চ ||৮||
पीतेक्षणं पीतसिरावनद्धं तद्वर्णविण्मूत्रनखाननं च | पित्तेन पाण्डुं मनुजं व्यवस्येद्युक्तं तथाऽन्यैस्तदुपद्रवैश्च ||८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 9 (9) · Śloka 9
শুক্লেক্ষণং শুক্লসিরাবনদ্ধং তদ্বর্ণবিণ্মূত্রনখাননং চ | কফেন পাণ্ডুং মনুজং ব্যবস্যেদ্যুক্তং তথাঽন্যৈস্তদুপদ্রবৈশ্চ ||৯||
शुक्लेक्षणं शुक्लसिरावनद्धं तद्वर्णविण्मूत्रनखाननं च | कफेन पाण्डुं मनुजं व्यवस्येद्युक्तं तथाऽन्यैस्तदुपद्रवैश्च ||९||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 10 (10) · Śloka 10
সর্বাত্মকে সর্বমিদং ব্যবস্যেদ্... |১০|
सर्वात्मके सर्वमिदं व्यवस्येद्... |१०|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 11 (10) · Śloka 11
... বক্ষ্যামি লিঙ্গান্যথ কামলাযাঃ | যো হ্যামযান্তে সহসাঽন্নমম্লমদ্যাদপথ্যানি চ তস্য পিত্তম্ ||১০|| করোতি পাণ্ডুং বদনং বিশেষাত্ পূর্বেরিতৌ তন্দ্রিবলক্ষযৌ চ |১১|
... वक्ष्यामि लिङ्गान्यथ कामलायाः | यो ह्यामयान्ते सहसाऽन्नमम्लमद्यादपथ्यानि च तस्य पित्तम् ||१०|| करोति पाण्डुं वदनं विशेषात् पूर्वेरितौ तन्द्रिबलक्षयौ च |११|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 12 (11) · Śloka 11
ভেদস্তু তস্যাঃ খলু কুম্ভসাহ্বঃ শোফো মহাংস্তত্র চ পর্বভেদঃ ||১১||
भेदस्तु तस्याः खलु कुम्भसाह्वः शोफो महांस्तत्र च पर्वभेदः ||११||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 13 (12) · Śloka 12
জ্বরাঙ্গমর্দভ্রমসাদতন্দ্রাক্ষযান্বিতো লাঘর(ব)কোঽলসাখ্যঃ |১২|
ज्वराङ्गमर्दभ्रमसादतन्द्राक्षयान्वितो लाघर(व)कोऽलसाख्यः |१२|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 14 (12) · Śloka 12
তং বাতপিত্তাদ্ধরিপীতনীলং হলীমকং নাম বদন্তি তজ্জ্ঞাঃ ||১২||
तं वातपित्ताद्धरिपीतनीलं हलीमकं नाम वदन्ति तज्ज्ञाः ||१२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 15 (13) · Śloka 13
উপদ্রবাস্তেষ্বরুচিঃ পিপাসা ছর্দির্জ্বরো মূর্ধরুজাঽগ্নিসাদঃ | শোফস্তথা কণ্ঠগতোঽবলত্বং মূর্চ্ছা ক্লমো হৃদ্যবপীডনং চ ||১৩||
उपद्रवास्तेष्वरुचिः पिपासा छर्दिर्ज्वरो मूर्धरुजाऽग्निसादः | शोफस्तथा कण्ठगतोऽबलत्वं मूर्च्छा क्लमो हृद्यवपीडनं च ||१३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 16 (14-15) · Śloka 15
সাধ্যং তু পাণ্ড্বামযিনং সমীক্ষ্য স্নিগ্ধং ঘৃতেনোর্ধ্বমধশ্চ শুদ্ধম্ | সম্পাদযেত্ ক্ষৌদ্রঘৃতপ্রগাঢৈর্হরীতকীচূর্ণযুতৈঃ প্রযোগৈঃ ||১৪|| পিবেদ্ঘৃতং বা রজনীবিপক্বং যত্ত্রৈফলং তৈল্বকমেব বাঽপি | বিরেচনদ্রব্যকৃতং পিবেদ্বা যোগাংশ্চ বৈরেচনিকান্ ঘৃতেন ||১৫||
साध्यं तु पाण्ड्वामयिनं समीक्ष्य स्निग्धं घृतेनोर्ध्वमधश्च शुद्धम् | सम्पादयेत् क्षौद्रघृतप्रगाढैर्हरीतकीचूर्णयुतैः प्रयोगैः ||१४|| पिबेद्घृतं वा रजनीविपक्वं यत्त्रैफलं तैल्वकमेव वाऽपि | विरेचनद्रव्यकृतं पिबेद्वा योगांश्च वैरेचनिकान् घृतेन ||१५||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 17 (16) · Śloka 16
মূত্রে নিকুম্ভার্ধপলং বিপাচ্য পিবেদভীক্ষ্ণং কুডবার্ধমাত্রম্ | খাদেদ্গুডং বাঽপ্যভযাবিপক্বমারগ্বধাদিক্বথিতং পিবেদ্বা ||১৬||
मूत्रे निकुम्भार्धपलं विपाच्य पिबेदभीक्ष्णं कुडवार्धमात्रम् | खादेद्गुडं वाऽप्यभयाविपक्वमारग्वधादिक्वथितं पिबेद्वा ||१६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 18 (17) · Śloka 17
অযোরজোব্যোষবিডঙ্গচূর্ণং লিহ্যাদ্ধরিদ্রাং ত্রিফলান্বিতাং বা | সর্পির্মধুভ্যাং বিদধীত বাঽপি শাস্ত্রপ্রদেশাভিহিতাংশ্চ যোগান্ ||১৭||
अयोरजोव्योषविडङ्गचूर्णं लिह्याद्धरिद्रां त्रिफलान्वितां वा | सर्पिर्मधुभ्यां विदधीत वाऽपि शास्त्रप्रदेशाभिहितांश्च योगान् ||१७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 19 (18) · Śloka 18
হরেচ্চ দোষান্ বহুশোঽল্পমাত্রান্ শ্বযেদ্ধি দোষেষ্বতিনির্হৃতেষু |১৮|
हरेच्च दोषान् बहुशोऽल्पमात्रान् श्वयेद्धि दोषेष्वतिनिर्हृतेषु |१८|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 20 (18) · Śloka 18
ধাত্রীফলানাং রসমিক্ষুজং চ মন্থং পিবেত্ ক্ষৌদ্রযুতং হিতাশী ||১৮||
धात्रीफलानां रसमिक्षुजं च मन्थं पिबेत् क्षौद्रयुतं हिताशी ||१८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 21 (19) · Śloka 20
উমে বৃহত্যৌ রজনীং শুকাখ্যাং কাকাদনীং চাপি সকাকমাচীম্ | আদারিবিম্বীং সকদম্বপুষ্পীং বিপাচ্য সর্পির্বিপচেত্ কষাযে ||১৯|| তত্ পাণ্ডুতাং হন্ত্যুপযুজ্যমানং ক্ষীরেণ বা মাগধিকা যথাগ্নি |২০|
उमे बृहत्यौ रजनीं शुकाख्यां काकादनीं चापि सकाकमाचीम् | आदारिबिम्बीं सकदम्बपुष्पीं विपाच्य सर्पिर्विपचेत् कषाये ||१९|| तत् पाण्डुतां हन्त्युपयुज्यमानं क्षीरेण वा मागधिका यथाग्नि |२०|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 22 (20) · Śloka 20
হিতং চ যষ্টীমধুজং কষাযং চূর্ণং সমং বা মধুনাঽবলিহ্যাত্ ||২০||
हितं च यष्टीमधुजं कषायं चूर्णं समं वा मधुनाऽवलिह्यात् ||२०||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 23 (21) · Śloka 21
গোমূত্রযুক্তং ত্রিফলাদলানাং দত্ত্বাঽঽযসং চূর্ণমনল্পকালম্ | প্রবালমুক্তাঞ্জনশঙ্খচূর্ণং লিহ্যাত্তথা কাঞ্চনগৈরিকোত্থম্ ||২১||
गोमूत्रयुक्तं त्रिफलादलानां दत्त्वाऽऽयसं चूर्णमनल्पकालम् | प्रवालमुक्ताञ्जनशङ्खचूर्णं लिह्यात्तथा काञ्चनगैरिकोत्थम् ||२१||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 24 (22) · Śloka 22
আজং শকৃত্স্যাত্ কুডবপ্রমাণং বিডং হরিদ্রা লবণোত্তমং চ | পৃথক্ পলাংশানি সমগ্রমেতচ্চূর্ণং হিতাশী মধুনাঽবলিহ্যাত্ ||২২||
आजं शकृत्स्यात् कुडवप्रमाणं विडं हरिद्रा लवणोत्तमं च | पृथक् पलांशानि समग्रमेतच्चूर्णं हिताशी मधुनाऽवलिह्यात् ||२२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 25 (23) · Śloka 23
মণ্ডূরলোহাগ্নিবিডঙ্গপথ্যাব্যোষাংশকঃ সর্বসমানতাপ্যঃ | মূত্রাসুতোঽযং মধুনাঽবলেহঃ পাণ্ড্বামযং হন্ত্যচিরেণ ঘোরম্ ||২৩||
मण्डूरलोहाग्निविडङ्गपथ्याव्योषांशकः सर्वसमानताप्यः | मूत्रासुतोऽयं मधुनाऽवलेहः पाण्ड्वामयं हन्त्यचिरेण घोरम् ||२३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 26 (24) · Śloka 24
বিভীতকাযোমলনাগরাণাং চূর্ণং তিলানাং চ গুডশ্চ মুখ্যঃ | তক্রানুপানো বটকঃ প্রযুক্তঃ ক্ষিণোতি ঘোরানপি পাণ্ডুরোগান্ ||২৪||
बिभीतकायोमलनागराणां चूर्णं तिलानां च गुडश्च मुख्यः | तक्रानुपानो वटकः प्रयुक्तः क्षिणोति घोरानपि पाण्डुरोगान् ||२४||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 27 (25-26) · Śloka 26
সৌবর্চলং হিঙ্গু কিরাততিক্তং কলাযমাত্রাণি সুখাম্বুনা বা | মূর্বাহরিদ্রামলকং চ লিহ্যাত্ স্থিতং গবাং সপ্তদিনানি মূত্রে ||২৫|| মূলং বলাচিত্রকযোঃ পিবেদ্বা পাণ্ড্বামযার্তোঽক্ষসমং হিতাশী | সুখাম্বুনা বা লবণেন তুল্যং শিগ্রোঃ ফলং ক্ষীরভুজোপযোজ্যম্ ||২৬||
सौवर्चलं हिङ्गु किराततिक्तं कलायमात्राणि सुखाम्बुना वा | मूर्वाहरिद्रामलकं च लिह्यात् स्थितं गवां सप्तदिनानि मूत्रे ||२५|| मूलं बलाचित्रकयोः पिबेद्वा पाण्ड्वामयार्तोऽक्षसमं हिताशी | सुखाम्बुना वा लवणेन तुल्यं शिग्रोः फलं क्षीरभुजोपयोज्यम् ||२६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 28 (27) · Śloka 27
ন্যগ্রোধবর্গস্য পিবেত্ কষাযং শীতং সিতাক্ষৌদ্রযুতং হিতাশী | শালাদিকং চাপ্যথ সারচূর্ণং ধাত্রীফলং বা মধুনাঽবলিহ্যাত্ ||২৭||
न्यग्रोधवर्गस्य पिबेत् कषायं शीतं सिताक्षौद्रयुतं हिताशी | शालादिकं चाप्यथ सारचूर्णं धात्रीफलं वा मधुनाऽवलिह्यात् ||२७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 29 (28-29) · Śloka 30
বিডঙ্গমুস্তত্রিফলাজমোদপরূষকব্যোষবিনির্দহন্যঃ | চূর্ণানি কৃত্বা গুডশর্করে চ তথৈব সর্পির্মধুনী শুভে চ ||২৮|| সম্ভারমেতদ্বিপচেন্নিধায সারোদকে সারবতো গণস্য | জাতং চ লেহ্যং মতিমান্ বিদিত্বা নিধাপযেন্মোক্ষকজে সমুদ্গে ||২৯|| হন্ত্যেষ লেহঃ খলু পাণ্ডুরোগং সশোথমুগ্রামপি কামলাং চ |৩০|
विडङ्गमुस्तत्रिफलाजमोदपरूषकव्योषविनिर्दहन्यः | चूर्णानि कृत्वा गुडशर्करे च तथैव सर्पिर्मधुनी शुभे च ||२८|| सम्भारमेतद्विपचेन्निधाय सारोदके सारवतो गणस्य | जातं च लेह्यं मतिमान् विदित्वा निधापयेन्मोक्षकजे समुद्गे ||२९|| हन्त्येष लेहः खलु पाण्डुरोगं सशोथमुग्रामपि कामलां च |३०|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 30 (30) · Śloka 30
সশর্করা কামলিনাং ত্রিভণ্ডী হিতা গবাক্ষী সগুডা চ শুণ্ঠী ||৩০||
सशर्करा कामलिनां त्रिभण्डी हिता गवाक्षी सगुडा च शुण्ठी ||३०||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 31 (31) · Śloka 31
কালেযকে চাপি ঘৃতং বিপক্বং হিতং চ তত্ স্যাদ্রজনীবিমিশ্রম্ |৩১|
कालेयके चापि घृतं विपक्वं हितं च तत् स्याद्रजनीविमिश्रम् |३१|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 32 (31) · Śloka 31
ধাতুং নদীজং জতু শৈলজং বা কুম্ভাহ্বযে মূত্রযুতং পিবেদ্বা ||৩১||
धातुं नदीजं जतु शैलजं वा कुम्भाह्वये मूत्रयुतं पिबेद्वा ||३१||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 33 (32) · Śloka 32
মূত্রে স্থিতং সৈন্ধবসম্প্রযুক্তং মাসং পিবেদ্বাঽপি হি লোহকিট্টম্ |৩২|
मूत्रे स्थितं सैन्धवसम्प्रयुक्तं मासं पिबेद्वाऽपि हि लोहकिट्टम् |३२|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 34 (32-35) · Śloka 35
দগ্ধ্বাঽক্ষকাষ্ঠৈর্মলমাযসং বা গোমূত্রনির্বাপিতমষ্টবারান্ ||৩২|| বিচূর্ণ্য লীঢং মধুনাঽচিরেণ কুম্ভাহ্বযং পাণ্ডুগদং নিহন্যাত্ | সিন্ধূদ্ভবং বাঽগ্নিসমং চ কৃত্বা ক্ষিপ্ত্বা চ মূত্রে সকৃদেব তপ্তম্ ||৩৩|| লৌহং চ কিট্টং বহুশশ্চ তপ্ত্বা নির্বাপ্য মূত্রে বহুশস্তথৈব | একীকৃতং গোজলপিষ্টমেতদৈকধ্যমাবাপ্য পচেদুখাযাম্ ||৩৪|| যথা ন দহ্যেত তথা বিশুষ্কং চূর্ণীকৃতং পেযমুদশ্বিতা তত্ | তক্রৌদনাশী বিজযেত রোগং পাণ্ডুং তথা দীপযতেঽনলং চ ||৩৫||
दग्ध्वाऽक्षकाष्ठैर्मलमायसं वा गोमूत्रनिर्वापितमष्टवारान् ||३२|| विचूर्ण्य लीढं मधुनाऽचिरेण कुम्भाह्वयं पाण्डुगदं निहन्यात् | सिन्धूद्भवं वाऽग्निसमं च कृत्वा क्षिप्त्वा च मूत्रे सकृदेव तप्तम् ||३३|| लौहं च किट्टं बहुशश्च तप्त्वा निर्वाप्य मूत्रे बहुशस्तथैव | एकीकृतं गोजलपिष्टमेतदैकध्यमावाप्य पचेदुखायाम् ||३४|| यथा न दह्येत तथा विशुष्कं चूर्णीकृतं पेयमुदश्विता तत् | तक्रौदनाशी विजयेत रोगं पाण्डुं तथा दीपयतेऽनलं च ||३५||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 35 (36) · Śloka 36
দ্রাক্ষাগুডূচ্যামলকীরসৈশ্চ সিদ্ধং ঘৃতং লাঘর(ব)কে হিতং চ |৩৬|
द्राक्षागुडूच्यामलकीरसैश्च सिद्धं घृतं लाघर(व)के हितं च |३६|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 36 (36-37) · Śloka 37
গৌডানরিষ্টান্ মধুশর্করাশ্চ মূত্রাসবান্ ক্ষারকৃতাংস্তথৈব ||৩৬|| স্নিগ্ধান্ রসানামলকৈরুপেতান্ কোলান্বিতান্ বাঽপি হি জাঙ্গলানাম্ | সেবেত শোফাভিহিতাংশ্চ যোগান্ পাণ্ড্বামযী শালিযবাংশ্চ নিত্যম্ ||৩৭||
गौडानरिष्टान् मधुशर्कराश्च मूत्रासवान् क्षारकृतांस्तथैव ||३६|| स्निग्धान् रसानामलकैरुपेतान् कोलान्वितान् वाऽपि हि जाङ्गलानाम् | सेवेत शोफाभिहितांश्च योगान् पाण्ड्वामयी शालियवांश्च नित्यम् ||३७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 37 (38) · Śloka 38
শ্বাসাতিসারারুচিকাসমূর্চ্ছাতৃট্ছর্দি শূলজ্বরশোফদাহান্ | তথাঽবিপাকস্বরভেদসাদান্ জযেদ্যথাস্বং প্রসামীক্ষ্য শাস্ত্রম্ ||৩৮||
श्वासातिसारारुचिकासमूर्च्छातृट्छर्दि शूलज्वरशोफदाहान् | तथाऽविपाकस्वरभेदसादान् जयेद्यथास्वं प्रसामीक्ष्य शास्त्रम् ||३८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 38 (39-40) · Śloka 40
অন্তেষু শূনং পরিহীনমধ্যং ম্লানং তথাঽন্তেষু চ মধ্যশূনম্ | গুদে চ শেফস্যথ মুষ্কশূনং প্রতাম্যমানং চ বিসঞ্জ্ঞকল্পম্ ||৩৯|| বিবর্জযেত্ পাণ্ডুকিনং যশোঽর্থী তথাঽতিসারজ্বরপীডিতং চ ||৪০||
अन्तेषु शूनं परिहीनमध्यं म्लानं तथाऽन्तेषु च मध्यशूनम् | गुदे च शेफस्यथ मुष्कशूनं प्रताम्यमानं च विसञ्ज्ञकल्पम् ||३९|| विवर्जयेत् पाण्डुकिनं यशोऽर्थी तथाऽतिसारज्वरपीडितं च ||४०||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana puShpikA · Śloka 44
ইতি সুশ্রুতসংহিতাযামুত্তরতন্ত্রান্তর্গতে কাযচিকিত্সাতন্ত্রে পাণ্ডুরোগপ্রতিষেধো নাম (ষষ্ঠোঽধ্যাযঃ, আদিতঃ) চতুশ্চত্বারিংশত্তমোঽধ্যাযঃ ||৪৪||
इति सुश्रुतसंहितायामुत्तरतन्त्रान्तर्गते कायचिकित्सातन्त्रे पाण्डुरोगप्रतिषेधो नाम (षष्ठोऽध्यायः, आदितः) चतुश्चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः ||४४||
🔊 Audio coming soon