Skip to content
AYANAAYURVEDAby Dr Vijaya Dwarampudi
Open navigation
Explore AyurvedaBook appointment

25. aṣṭavidhaśastrakarmīyādhyāyaḥ

Adhikarana 1 (1-4) · Śloka 5

অথাতোঽষ্টবিধশস্ত্রকর্মীযমধ্যাযং ব্যাখ্যাস্যামঃ ||১|| যথোবাচ ভগবান্ ধন্বন্তরিঃ ||২|| ছেদ্যা ভগন্দরা গ্রন্থিঃ শ্লৈষ্মিকস্তিলকালকঃ | ব্রণবর্ত্মার্বুদান্যর্শশ্চর্মকীলোঽস্থিমাংসগম্ ||৩|| শল্যং জতুমণির্মাংসসঙ্ঘাতো গলশুণ্ডিকা | স্নাযুমাংসসিরাকোথো বল্মীকং শতপোনকঃ ||৪|| অধ্রুষশ্চোপদংশাশ্চ মাংসকন্দ্যধিমাংসকঃ |৫|

View original

अथातोऽष्टविधशस्त्रकर्मीयमध्यायं व्याख्यास्यामः ||१|| यथोवाच भगवान् धन्वन्तरिः ||२|| छेद्या भगन्दरा ग्रन्थिः श्लैष्मिकस्तिलकालकः | व्रणवर्त्मार्बुदान्यर्शश्चर्मकीलोऽस्थिमांसगम् ||३|| शल्यं जतुमणिर्मांससङ्घातो गलशुण्डिका | स्नायुमांससिराकोथो वल्मीकं शतपोनकः ||४|| अध्रुषश्चोपदंशाश्च मांसकन्द्यधिमांसकः |५|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 2 (5-8) · Śloka 8

ভেদ্যা বিদ্রধযোঽন্যত্র সর্বজাদ্গ্রন্থযস্ত্রযঃ ||৫|| আদিতো যে বিসর্পাশ্চ বৃদ্ধযঃ সবিদারিকাঃ | প্রমেহপিডকাঃ শোফঃ স্তনরোগোঽবমন্থকাঃ ||৬|| কুম্ভীকানুশযী নাড্যো বৃন্দৌ পুষ্করিকাঽলজী | প্রাযশঃ ক্ষুদ্ররোগাশ্চ পুপ্পুটৌ তালুদন্তজৌ ||৭|| তুণ্ডিকেরী গিলাযুশ্চ পূর্বং যে চ প্রপাকিণঃ | বস্তিস্তথাঽশ্মরীহেতোর্মেদোজা যে চ কেচন ||৮||

View original

भेद्या विद्रधयोऽन्यत्र सर्वजाद्ग्रन्थयस्त्रयः ||५|| आदितो ये विसर्पाश्च वृद्धयः सविदारिकाः | प्रमेहपिडकाः शोफः स्तनरोगोऽवमन्थकाः ||६|| कुम्भीकानुशयी नाड्यो वृन्दौ पुष्करिकाऽलजी | प्रायशः क्षुद्ररोगाश्च पुप्पुटौ तालुदन्तजौ ||७|| तुण्डिकेरी गिलायुश्च पूर्वं ये च प्रपाकिणः | बस्तिस्तथाऽश्मरीहेतोर्मेदोजा ये च केचन ||८||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 3 (9) · Śloka 10

লেখ্যাশ্চতস্রো রোহিণ্যঃ কিলাসমুপজিহ্বিকা | মেদোজো দন্তবৈদর্ভো গ্রন্থির্বর্ত্মাধিজিহ্বিকা ||৯|| অর্শাংসি মণ্ডলং মাংসকন্দী মাংসোন্নতিস্তথা |১০|

View original

लेख्याश्चतस्रो रोहिण्यः किलासमुपजिह्विका | मेदोजो दन्तवैदर्भो ग्रन्थिर्वर्त्माधिजिह्विका ||९|| अर्शांसि मण्डलं मांसकन्दी मांसोन्नतिस्तथा |१०|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 4 (10) · Śloka 10

বেধ্যাঃ সিরা বহুবিধা মূত্রবৃদ্ধির্দকোদরম্ ||১০||

View original

वेध्याः सिरा बहुविधा मूत्रवृद्धिर्दकोदरम् ||१०||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 5 (11) · Śloka 11

এষ্যা নাড্যঃ সশল্যাশ্চ ব্রণা উন্মার্গিণশ্চ যে |১১|

View original

एष्या नाड्यः सशल्याश्च व्रणा उन्मार्गिणश्च ये |११|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 6 (11) · Śloka 12

আহার্যাঃ শর্করাস্তিস্রো দন্তকর্ণমলোঽশ্মরী ||১১|| শল্যানি মূঢগর্ভাশ্চ বর্চশ্চ নিচিতং গুদে |১২|

View original

आहार्याः शर्करास्तिस्रो दन्तकर्णमलोऽश्मरी ||११|| शल्यानि मूढगर्भाश्च वर्चश्च निचितं गुदे |१२|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 7 (12-15) · Śloka 16

স্রাব্যা বিদ্রধযঃ পঞ্চ ভবেযুঃ সর্বজাদৃতে ||১২|| কুষ্ঠানি বাযুঃ সরুজঃ শোফো যশ্চৈকদেশজঃ | পাল্যামযাঃ শ্লীপদানি বিষজুষ্টং চ শোণিতম্ ||১৩|| অর্বুদানি বিসর্পাশ্চ গ্রন্থযশ্চাদিতশ্চ তে | ত্রযস্ত্রযশ্চোপদংশাঃ স্তনরোগা বিদারিকা ||১৪|| সু(শু)ষিরো গলশালূকং কণ্টকাঃ কৃমিদন্তকঃ | দন্তবেষ্টঃ সোপকুশঃ শীতাদো দন্তপুপ্পুটঃ ||১৫|| পিত্তাসৃক্কফজাশ্চৌষ্ঠ্যাঃ ক্ষুদ্ররোগাশ্চ ভূযশঃ |১৬|

View original

स्राव्या विद्रधयः पञ्च भवेयुः सर्वजादृते ||१२|| कुष्ठानि वायुः सरुजः शोफो यश्चैकदेशजः | पाल्यामयाः श्लीपदानि विषजुष्टं च शोणितम् ||१३|| अर्बुदानि विसर्पाश्च ग्रन्थयश्चादितश्च ते | त्रयस्त्रयश्चोपदंशाः स्तनरोगा विदारिका ||१४|| सु(शु)षिरो गलशालूकं कण्टकाः कृमिदन्तकः | दन्तवेष्टः सोपकुशः शीतादो दन्तपुप्पुटः ||१५|| पित्तासृक्कफजाश्चौष्ठ्याः क्षुद्ररोगाश्च भूयशः |१६|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 8 (16) · Śloka 17

সীব্যা মেদঃসমুত্থাশ্চ ভিন্নাঃ সুলিখিতা গদাঃ ||১৬|| সদ্যোব্রণাশ্চ যে চৈব চলসন্ধিব্যপাশ্রিতাঃ |১৭|

View original

सीव्या मेदःसमुत्थाश्च भिन्नाः सुलिखिता गदाः ||१६|| सद्योव्रणाश्च ये चैव चलसन्धिव्यपाश्रिताः |१७|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 9 (17) · Śloka 18

ন ক্ষারাগ্নিবিষৈর্জুষ্টা ন চ মারুতবাহিনঃ ||১৭|| নান্তর্লোহিতশল্যাশ্চ... |১৮|

View original

न क्षाराग्निविषैर्जुष्टा न च मारुतवाहिनः ||१७|| नान्तर्लोहितशल्याश्च... |१८|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 10 (18) · Śloka 18

... তেষু সম্যগ্বিশোধনম্ |১৮|

View original

... तेषु सम्यग्विशोधनम् |१८|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 11 (18-19) · Śloka 19

পাংশুরোমনখাদীনি চলমস্থি ভবেচ্চ যত্ ||১৮|| অহৃতানি যতোঽমূনি পাচযেযুর্ভৃশং ব্রণম্ | রুজশ্চ বিবিধাঃ কুর্যুস্তস্মাদেতান্ বিশোধযেত্ ||১৯||

View original

पांशुरोमनखादीनि चलमस्थि भवेच्च यत् ||१८|| अहृतानि यतोऽमूनि पाचयेयुर्भृशं व्रणम् | रुजश्च विविधाः कुर्युस्तस्मादेतान् विशोधयेत् ||१९||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 12 (20-26) · Śloka 26

ততো ব্রণং সমুন্নম্য স্থাপযিত্বা যথাস্থিতম্ | সীব্যেত্ সূক্ষ্মেণ সূত্রেণ বল্কেনাশ্মন্তকস্য বা ||২০|| শণজক্ষৌমসূত্রাভ্যাং স্নায্বা বালেন বা পুনঃ | মূর্বাগুডূচীতানৈর্বা সীব্যেদ্বেল্লিতকং শনৈঃ ||২১|| সীব্যেদ্গোফণিকাং বাঽপি সীব্যেদ্বা তুন্নসেবনীম্ | ঋজুগ্রন্থিমথো বাঽপি যথাযোগমথাপি বা ||২২|| দেশেঽল্পমাংসে সন্ধৌ চ সূচী বৃত্তাঽঙ্গুলদ্বযম্ | আযতা ত্র্যঙ্গুলা ত্র্যস্রা মাংসলে চাঽপি পূজিতা ||২৩|| ধনুর্বক্রা হিতা মর্মফলকোশোদরোপরি | ইত্যেতাস্ত্রিবিধাঃ সূচীস্তীক্ষ্ণাগ্রাঃ সুসমাহিতাঃ ||২৪|| কারযেন্মালতীপুষ্পবৃন্তাগ্রপরিমণ্ডলাঃ | নাতিদূরে নিকৃষ্টে বা সূচীং কর্মণি পাতযেত্ ||২৫|| দূরাদ্রুজো ব্রণৌষ্ঠস্য সন্নিকৃষ্টেঽবলুঞ্চনম্ ||২৬||

View original

ततो व्रणं समुन्नम्य स्थापयित्वा यथास्थितम् | सीव्येत् सूक्ष्मेण सूत्रेण वल्केनाश्मन्तकस्य वा ||२०|| शणजक्षौमसूत्राभ्यां स्नाय्वा बालेन वा पुनः | मूर्वागुडूचीतानैर्वा सीव्येद्वेल्लितकं शनैः ||२१|| सीव्येद्गोफणिकां वाऽपि सीव्येद्वा तुन्नसेवनीम् | ऋजुग्रन्थिमथो वाऽपि यथायोगमथापि वा ||२२|| देशेऽल्पमांसे सन्धौ च सूची वृत्ताऽङ्गुलद्वयम् | आयता त्र्यङ्गुला त्र्यस्रा मांसले चाऽपि पूजिता ||२३|| धनुर्वक्रा हिता मर्मफलकोशोदरोपरि | इत्येतास्त्रिविधाः सूचीस्तीक्ष्णाग्राः सुसमाहिताः ||२४|| कारयेन्मालतीपुष्पवृन्ताग्रपरिमण्डलाः | नातिदूरे निकृष्टे वा सूचीं कर्मणि पातयेत् ||२५|| दूराद्रुजो व्रणौष्ठस्य सन्निकृष्टेऽवलुञ्चनम् ||२६||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 13 (27-28) · Śloka 28

অথ ক্ষৌমপিচুচ্ছন্নং সুস্যূতং প্রতিসারযেত্ | প্রিযঙ্গ্বঞ্জনযষ্ট্যাহ্বরোধ্রচূর্ণৈঃ সমন্ততঃ ||২৭|| শল্লকীফলচূর্ণৈর্বা ক্ষৌমধ্যামেন বা পুনঃ | ততো ব্রণং যথাযোগং বদ্ধ্বাঽঽচারিকমাদিশেত্ ||২৮||

View original

अथ क्षौमपिचुच्छन्नं सुस्यूतं प्रतिसारयेत् | प्रियङ्ग्वञ्जनयष्ट्याह्वरोध्रचूर्णैः समन्ततः ||२७|| शल्लकीफलचूर्णैर्वा क्षौमध्यामेन वा पुनः | ततो व्रणं यथायोगं बद्ध्वाऽऽचारिकमादिशेत् ||२८||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 14 (29) · Śloka 29

এতদষ্টবিধং কর্ম সমাসেন প্রকীর্তিতম্ | চিকিত্সিতেষু কার্ত্স্ন্যেন বিস্তরস্তস্য বক্ষ্যতে ||২৯||

View original

एतदष्टविधं कर्म समासेन प्रकीर्तितम् | चिकित्सितेषु कार्त्स्न्येन विस्तरस्तस्य वक्ष्यते ||२९||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 15 (30) · Śloka 30

হীনাতিরিক্তং তির্যক্ চ গাত্রচ্ছেদনমাত্মনঃ | এতাশ্চতস্রোঽষ্টবিধে কর্মণি ব্যাপদঃ স্মৃতাঃ ||৩০||

View original

हीनातिरिक्तं तिर्यक् च गात्रच्छेदनमात्मनः | एताश्चतस्रोऽष्टविधे कर्मणि व्यापदः स्मृताः ||३०||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 16 (31) · Śloka 31

অজ্ঞানলোভাহিতবাক্যযোগভযপ্রমোহৈরপরৈশ্চ ভাবৈঃ | যদা প্রযুঞ্জীত ভিষক্ কুশস্ত্রং তদা স শেষান্ কুরুতে বিকারান্ ||৩১||

View original

अज्ञानलोभाहितवाक्ययोगभयप्रमोहैरपरैश्च भावैः | यदा प्रयुञ्जीत भिषक् कुशस्त्रं तदा स शेषान् कुरुते विकारान् ||३१||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 17 (32) · Śloka 32

তং ক্ষারশস্ত্রাগ্নিভিরৌষধৈশ্চ ভূযোঽভিযুঞ্জানমযুক্তিযুক্তম্ | জিজীবিষুর্দূরত এব বৈদ্যং বিবর্জযেদুগ্রবিষাহিতুল্যম্ ||৩২||

View original

तं क्षारशस्त्राग्निभिरौषधैश्च भूयोऽभियुञ्जानमयुक्तियुक्तम् | जिजीविषुर्दूरत एव वैद्यं विवर्जयेदुग्रविषाहितुल्यम् ||३२||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 18 (33) · Śloka 33

তদেব যুক্তং ত্বতি মর্মসন্ধীন্ হিংস্যাত্ সিরাঃ স্নাযুমথাস্থি চৈব | মূর্খপ্রযুক্তং পুরুষং ক্ষণেন প্রাণৈর্বিযুঞ্জ্যাদথবা কদাচিত্ ||৩৩||

View original

तदेव युक्तं त्वति मर्मसन्धीन् हिंस्यात् सिराः स्नायुमथास्थि चैव | मूर्खप्रयुक्तं पुरुषं क्षणेन प्राणैर्वियुञ्ज्यादथवा कदाचित् ||३३||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 19 (34-35) · Śloka 35

ভ্রমঃ প্রলাপঃ পতনং প্রমোহো বিচেষ্টনং সংলযনোষ্ণতে চ | স্রস্তাঙ্গতা মূর্চ্ছনমূর্ধ্ববাতস্তীব্রা রুজো বাতকৃতাশ্চ তাস্তাঃ ||৩৪|| মাংসোদকাভং রুধিরং চ গচ্ছেত্ সর্বেন্দ্রিযার্থোপরমস্তথৈব | দশার্ধসঙ্খ্যেষ্বপি বিক্ষতেষু সামান্যতো মর্মসু লিঙ্গমুক্তম্ ||৩৫||

View original

भ्रमः प्रलापः पतनं प्रमोहो विचेष्टनं संलयनोष्णते च | स्रस्ताङ्गता मूर्च्छनमूर्ध्ववातस्तीव्रा रुजो वातकृताश्च तास्ताः ||३४|| मांसोदकाभं रुधिरं च गच्छेत् सर्वेन्द्रियार्थोपरमस्तथैव | दशार्धसङ्ख्येष्वपि विक्षतेषु सामान्यतो मर्मसु लिङ्गमुक्तम् ||३५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 20 (36-39) · Śloka 39

সুরেন্দ্রগোপপ্রতিমং প্রভূতং রক্তং স্রবেদ্বৈ ক্ষততশ্চ বাযুঃ | করোতি রোগান্ বিবিধান্ যথোক্তাংশ্ছিন্নাসু ভিন্নাস্বথবা সিরাসু ||৩৬|| কৌব্জ্যং শরীরাবযবাবসাদঃ ক্রিযাস্বশক্তিস্তুমুলা রুজশ্চ | চিরাদ্ব্র্রণো রোহতি যস্য চাপি তং স্নাযুবিদ্ধং মনুজং ব্যবস্যেত্ ||৩৭|| শোফাতিবৃদ্ধিস্তুমুলা রুজশ্চ বলক্ষযঃ পর্বসু ভেদশোফৌ | ক্ষতেষু সন্ধিষ্বচলাচলেষু স্যাত্ সন্ধিকর্মোপরতিশ্চ লিঙ্গম্ ||৩৮|| ঘোরা রুজো যস্য নিশাদিনেষু সর্বাস্ববস্থাসু ন শান্তিরস্তি | তৃষ্ণাঙ্গসাদৌ শ্বযথুশ্চ রুক্ চ তমস্থিবিদ্ধং মনুজং ব্যবস্যেত্ ||৩৯||

View original

सुरेन्द्रगोपप्रतिमं प्रभूतं रक्तं स्रवेद्वै क्षततश्च वायुः | करोति रोगान् विविधान् यथोक्तांश्छिन्नासु भिन्नास्वथवा सिरासु ||३६|| कौब्ज्यं शरीरावयवावसादः क्रियास्वशक्तिस्तुमुला रुजश्च | चिराद्व्र्रणो रोहति यस्य चापि तं स्नायुविद्धं मनुजं व्यवस्येत् ||३७|| शोफातिवृद्धिस्तुमुला रुजश्च बलक्षयः पर्वसु भेदशोफौ | क्षतेषु सन्धिष्वचलाचलेषु स्यात् सन्धिकर्मोपरतिश्च लिङ्गम् ||३८|| घोरा रुजो यस्य निशादिनेषु सर्वास्ववस्थासु न शान्तिरस्ति | तृष्णाङ्गसादौ श्वयथुश्च रुक् च तमस्थिविद्धं मनुजं व्यवस्येत् ||३९||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 21 (40) · Śloka 40

যথাস্বমেতানি বিভাবযেচ্চ লিঙ্গানি মর্মস্বভিতাডিতেষু |৪০|

View original

यथास्वमेतानि विभावयेच्च लिङ्गानि मर्मस्वभिताडितेषु |४०|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 22 (40) · Śloka 40

স্পর্শং ন জানাতি বিপাণ্ডুবর্ণো যো মাংসমর্মণ্যভিতাডিতঃ স্যাত্ ||৪০||

View original

स्पर्शं न जानाति विपाण्डुवर्णो यो मांसमर्मण्यभिताडितः स्यात् ||४०||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 23 (41) · Śloka 41

আত্মানমেবাথ জঘন্যকারী শস্ত্রেণ যো হন্তি হি কর্ম কুর্বন্ | তমাত্মবানাত্মহনং কুবৈদ্যং বিবর্জযেদাযুরভীপ্সমানঃ ||৪১||

View original

आत्मानमेवाथ जघन्यकारी शस्त्रेण यो हन्ति हि कर्म कुर्वन् | तमात्मवानात्महनं कुवैद्यं विवर्जयेदायुरभीप्समानः ||४१||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 24 (42) · Śloka 42

তির্যক্ প্রণিহিতে শস্ত্রে দোষাঃ পূর্বমুদাহৃতাঃ | তস্মাত্ পরিহরন্ দোষান্ কুর্যাচ্ছস্ত্রনিপাতনম্ ||৪২||

View original

तिर्यक् प्रणिहिते शस्त्रे दोषाः पूर्वमुदाहृताः | तस्मात् परिहरन् दोषान् कुर्याच्छस्त्रनिपातनम् ||४२||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 25 (43) · Śloka 44

মাতরং পিতরং পুত্রান্ বান্ধবানপি চাতুরঃ | অপ্যেতানভিশঙ্কেত বৈদ্যে বিশ্বাসমেতি চ ||৪৩|| বিসৃজত্যাত্মনাঽঽত্মানং ন চৈনং পরিশঙ্কতে |৪৪|

View original

मातरं पितरं पुत्रान् बान्धवानपि चातुरः | अप्येतानभिशङ्केत वैद्ये विश्वासमेति च ||४३|| विसृजत्यात्मनाऽऽत्मानं न चैनं परिशङ्कते |४४|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 26 (44) · Śloka 44

তস্মাত্ পুত্রবদেবৈনং পালযেদাতুরং ভিষক্ ||৪৪||

View original

तस्मात् पुत्रवदेवैनं पालयेदातुरं भिषक् ||४४||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 27 (45) · Śloka 45

ধর্মার্থৌ কীর্তিমিত্যর্থং সতাং গ্রহণমুত্তমম্ | প্রাপ্নুযাত্ স্বর্গবাসং চ হিতমারভ্য কর্মণা ||৪৫||

View original

धर्मार्थौ कीर्तिमित्यर्थं सतां ग्रहणमुत्तमम् | प्राप्नुयात् स्वर्गवासं च हितमारभ्य कर्मणा ||४५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 28 (46) · Śloka 46

কর্মণা কশ্চিদেকেন দ্বাভ্যাং কশ্চিত্ত্রিভিস্তথা | বিকারঃ সাধ্যতে কশ্চিচ্চতুর্ভিরপি কর্মভিঃ ||৪৬||

View original

कर्मणा कश्चिदेकेन द्वाभ्यां कश्चित्त्रिभिस्तथा | विकारः साध्यते कश्चिच्चतुर्भिरपि कर्मभिः ||४६||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana puShpikA · Śloka 25

ইতি সুশ্রুতসংহিতাযাং সূত্রস্থানেঽষ্টবিধশস্ত্রকর্মীযো নাম পঞ্চবিংশোঽধ্যাযঃ ||২৫||

View original

इति सुश्रुतसंहितायां सूत्रस्थानेऽष्टविधशस्त्रकर्मीयो नाम पञ्चविंशोऽध्यायः ||२५||

🔊 Audio coming soon

25. aṣṭavidhaśastrakarmīyādhyāyaḥ — Sushruta Samhita | Ayana Ayurveda | Dr Vijaya Dwarampudi