Skip to content
AYANAAYURVEDAby Dr Vijaya Dwarampudi
Open navigation
Explore AyurvedaBook appointment

1. aupadravikādhyāyaḥ

Adhikarana 1 (1-2) · Śloka 2

অথাত ঔপদ্রবিকমধ্যাযং ব্যাখ্যাস্যামঃ ||১|| যথোবাচ ভগবান্ ধন্বন্তরিঃ ||২||

View original

अथात औपद्रविकमध्यायं व्याख्यास्यामः ||१|| यथोवाच भगवान् धन्वन्तरिः ||२||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 2 (3) · Śloka 4

অধ্যাযানাং শতে বিংশে যদুক্তমসকৃন্মযা | বক্ষ্যামি বহুধা সম্যগুত্তরেঽর্থানিমানিতি ||৩|| ইদানীং তত্ প্রবক্ষ্যামি তন্ত্রমুত্তরমুত্তমম্ |৪|

View original

अध्यायानां शते विंशे यदुक्तमसकृन्मया | वक्ष्यामि बहुधा सम्यगुत्तरेऽर्थानिमानिति ||३|| इदानीं तत् प्रवक्ष्यामि तन्त्रमुत्तरमुत्तमम् |४|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 3 (4-7) · Śloka 8

নিখিলেনোপদিশ্যন্তে যত্র রোগাঃ পৃথগ্বিধাঃ ||৪|| শালাক্যতন্ত্রাভিহিতা বিদেহাধিপকীর্তিতাঃ | যে চ বিস্তরতো দৃষ্টাঃ কুমারাবাধহেতবঃ ||৫|| ষট্সু কাযচিকিত্সাসু যে চোক্তাঃ পরমর্ষিভিঃ | উপসর্গাদযো রোগা যে চাপ্যাগন্তবঃ স্মৃতাঃ ||৬|| ত্রিষষ্টী রসসংসর্গাঃ স্বস্থবৃত্তং তথৈব চ | যুক্তার্থা যুক্তযশ্চৈব দোষভেদাস্তথৈব চ ||৭|| যত্রোক্তা বিবিধা অর্থা রোগসাধনহেতবঃ |৮|

View original

निखिलेनोपदिश्यन्ते यत्र रोगाः पृथग्विधाः ||४|| शालाक्यतन्त्राभिहिता विदेहाधिपकीर्तिताः | ये च विस्तरतो दृष्टाः कुमाराबाधहेतवः ||५|| षट्सु कायचिकित्सासु ये चोक्ताः परमर्षिभिः | उपसर्गादयो रोगा ये चाप्यागन्तवः स्मृताः ||६|| त्रिषष्टी रससंसर्गाः स्वस्थवृत्तं तथैव च | युक्तार्था युक्तयश्चैव दोषभेदास्तथैव च ||७|| यत्रोक्ता विविधा अर्था रोगसाधनहेतवः |८|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 4 (8-9) · Śloka 9

মহতস্তস্য তন্ত্রস্য দুর্গাধস্যাম্বুধেরিব ||৮|| আদাবেবোত্তমাঙ্গস্থান্ রোগানভিদধাম্যহম্ | সঙ্খ্যযা লক্ষণৈশ্চাপি সাধ্যাসাধ্যক্রমেণ চ ||৯||

View original

महतस्तस्य तन्त्रस्य दुर्गाधस्याम्बुधेरिव ||८|| आदावेवोत्तमाङ्गस्थान् रोगानभिदधाम्यहम् | सङ्ख्यया लक्षणैश्चापि साध्यासाध्यक्रमेण च ||९||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 5 (10) · Śloka 11

বিদ্যাদ্দ্বযঙ্গুলবাহুল্যং স্বাঙ্গুষ্ঠোদরসম্মিতম্ | দ্ব্যঙ্গুলং সর্বতঃ সার্ধং ভিষঙ্নযনবুদ্বুদম্ ||১০|| সুবৃত্তং গোস্তনাকারং সর্বভূতগুণোদ্ভবম্ |১১|

View original

विद्याद्द्वयङ्गुलबाहुल्यं स्वाङ्गुष्ठोदरसम्मितम् | द्व्यङ्गुलं सर्वतः सार्धं भिषङ्नयनबुद्बुदम् ||१०|| सुवृत्तं गोस्तनाकारं सर्वभूतगुणोद्भवम् |११|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 6 (11) · Śloka 12

পলং ভুবোঽগ্নিতো রক্তং বাতাত্ কৃষ্ণং সিতং জলাত্ ||১১|| আকাশাদশ্রুমার্গাশ্চ জাযন্তে নেত্রবুদ্বুদে |১২|

View original

पलं भुवोऽग्नितो रक्तं वातात् कृष्णं सितं जलात् ||११|| आकाशादश्रुमार्गाश्च जायन्ते नेत्रबुद्बुदे |१२|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 7 (12-13) · Śloka 13

দৃষ্টিং চাত্র তথা বক্ষ্যে যথা ব্রূযাদ্বিশারদঃ ||১২|| নেত্রাযামত্রিভাগং তু কৃষ্ণমণ্ডলমুচ্যতে | কৃষ্ণাত্ সপ্তমমিচ্ছন্তি দৃষ্টিং দৃষ্টিবিশারদাঃ ||১৩||

View original

दृष्टिं चात्र तथा वक्ष्ये यथा ब्रूयाद्विशारदः ||१२|| नेत्रायामत्रिभागं तु कृष्णमण्डलमुच्यते | कृष्णात् सप्तममिच्छन्ति दृष्टिं दृष्टिविशारदाः ||१३||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 8 (14) · Śloka 14

মণ্ডলানি চ সন্ধীংশ্চ পটলানি চ লোচনে | যথাক্রমং বিজানীযাত্ পঞ্চ ষট্ চ ষডেব চ ||১৪||

View original

मण्डलानि च सन्धींश्च पटलानि च लोचने | यथाक्रमं विजानीयात् पञ्च षट् च षडेव च ||१४||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 9 (15) · Śloka 15

পক্ষ্মবর্ত্মশ্বেতকৃষ্ণদৃষ্টীনাং মণ্ডলানি তু | অনুপূর্বং তু তে মধ্যাশ্চত্বারোঽন্ত্যা যথোত্তরম্ ||১৫||

View original

पक्ष्मवर्त्मश्वेतकृष्णदृष्टीनां मण्डलानि तु | अनुपूर्वं तु ते मध्याश्चत्वारोऽन्त्या यथोत्तरम् ||१५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 10 (16) · Śloka 16

পক্ষ্মবর্ত্মগতঃ সন্ধির্বর্ত্মশুক্লগতোঽপরঃ | শুক্লকৃষ্ণগতস্ত্বন্যঃ কৃষ্ণদৃষ্টিগতোঽপরঃ | ততঃ কনীনকগতঃ ষষ্ঠশ্চাপাঙ্গগঃ স্মৃতঃ ||১৬||

View original

पक्ष्मवर्त्मगतः सन्धिर्वर्त्मशुक्लगतोऽपरः | शुक्लकृष्णगतस्त्वन्यः कृष्णदृष्टिगतोऽपरः | ततः कनीनकगतः षष्ठश्चापाङ्गगः स्मृतः ||१६||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 11 (17) · Śloka 17

দ্বে বর্ত্মপটলে বিদ্যাচ্চত্বার্যন্যানি চাক্ষিণি | জাযতে তিমিরং যেষু ব্যাধিঃ পরমদারুণঃ ||১৭||

View original

द्वे वर्त्मपटले विद्याच्चत्वार्यन्यानि चाक्षिणि | जायते तिमिरं येषु व्याधिः परमदारुणः ||१७||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 12 (18) · Śloka 19

তেজোজলাশ্রিতং বাহ্যং তেষ্বন্যত্ পিশিতাশ্রিতম্ | মেদস্তৃতীযং পটলমাশ্রিতং ত্বস্থি চাপরম্ ||১৮|| পঞ্চমাংশসমং দৃষ্টেস্তেষাং বাহুল্যমিষ্যতে |১৯|

View original

तेजोजलाश्रितं बाह्यं तेष्वन्यत् पिशिताश्रितम् | मेदस्तृतीयं पटलमाश्रितं त्वस्थि चापरम् ||१८|| पञ्चमांशसमं दृष्टेस्तेषां बाहुल्यमिष्यते |१९|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 13 (19) · Śloka 20

সিরাণাং কণ্ডরাণাং চ মেদসঃ কালকস্য চ ||১৯|| গুণাঃ কালাত্ পরঃ শ্লেষ্মা বন্ধনেঽক্ষ্ণোঃ সিরাযুতঃ |২০|

View original

सिराणां कण्डराणां च मेदसः कालकस्य च ||१९|| गुणाः कालात् परः श्लेष्मा बन्धनेऽक्ष्णोः सिरायुतः |२०|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 14 (20) · Śloka 21

সিরানুসারিভির্দোষৈর্বিগুণৈরূর্ধ্বমাগতৈঃ ||২০|| জাযন্তে নেত্রভাগেষু রোগাঃ পরমদারুণাঃ |২১|

View original

सिरानुसारिभिर्दोषैर्विगुणैरूर्ध्वमागतैः ||२०|| जायन्ते नेत्रभागेषु रोगाः परमदारुणाः |२१|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 15 (21-23) · Śloka 23

তত্রাবিলং সসংরম্ভমশ্রুকণ্ডূপদেহবত্ ||২১|| গুরূষাতোদরাগাদ্যৈর্জুষ্টং চাব্যক্তলক্ষণৈঃ | সশূলং বর্ত্মকোষেষু শূকপূর্ণাভমেব চ ||২২|| বিহন্যমানং রূপে বা ক্রিযাস্বক্ষি যথা পুরা | দৃষ্ট্বৈব ধীমান্ বুধ্যেত দোষেণাধিষ্ঠিতং তু তত্ ||২৩||

View original

तत्राविलं ससंरम्भमश्रुकण्डूपदेहवत् ||२१|| गुरूषातोदरागाद्यैर्जुष्टं चाव्यक्तलक्षणैः | सशूलं वर्त्मकोषेषु शूकपूर्णाभमेव च ||२२|| विहन्यमानं रूपे वा क्रियास्वक्षि यथा पुरा | दृष्ट्वैव धीमान् बुध्येत दोषेणाधिष्ठितं तु तत् ||२३||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 16 (24) · Śloka 24

তত্র সম্ভবমাসাদ্য যথাদোষং ভিষগ্জিতম্ | বিদধ্যান্নেত্রজা রোগা বলবন্তঃ স্যুরন্যথা ||২৪||

View original

तत्र सम्भवमासाद्य यथादोषं भिषग्जितम् | विदध्यान्नेत्रजा रोगा बलवन्तः स्युरन्यथा ||२४||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 17 (25) · Śloka 25

সঙ্ক্ষেপতঃ ক্রিযাযোগো নিদানপরিবর্জনম্ | বাতাদীনাং প্রতীঘাতঃ প্রোক্তো বিস্তরতঃ পুনঃ ||২৫||

View original

सङ्क्षेपतः क्रियायोगो निदानपरिवर्जनम् | वातादीनां प्रतीघातः प्रोक्तो विस्तरतः पुनः ||२५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 18 (26-27) · Śloka 27

উষ্ণাভিতপ্তস্য জলপ্রবেশাদ্দূরেক্ষণাত্ স্বপ্নবিপর্যযাচ্চ | প্রসক্তসংরোদনকোপশোকক্লেশাভিঘাতাদতিমৈথুনাচ্চ ||২৬|| শুক্তারনালাম্লকুলত্থমাষনিষেবণাদ্বেগবিনিগ্রহাচ্চ | স্বেদাদথো ধূমনিষেবণাচ্চ ছর্দের্বিঘাতাদ্বমনাতিযোগাত্ | বাষ্পগ্রহাত্ সূক্ষ্মনিরীক্ষণাচ্চ নেত্রে বিকারান্ জনযন্তি দোষাঃ ||২৭||

View original

उष्णाभितप्तस्य जलप्रवेशाद्दूरेक्षणात् स्वप्नविपर्ययाच्च | प्रसक्तसंरोदनकोपशोकक्लेशाभिघातादतिमैथुनाच्च ||२६|| शुक्तारनालाम्लकुलत्थमाषनिषेवणाद्वेगविनिग्रहाच्च | स्वेदादथो धूमनिषेवणाच्च छर्देर्विघाताद्वमनातियोगात् | बाष्पग्रहात् सूक्ष्मनिरीक्षणाच्च नेत्रे विकारान् जनयन्ति दोषाः ||२७||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 19 (28) · Śloka 29

বাতাদ্দশ তথা পিত্তাত্ কফাচ্চৈব ত্রযোদশ | রক্তাত্ ষোডশ বিজ্ঞেযাঃ সর্বজাঃ পঞ্চবিংশতিঃ ||২৮|| তথা বাহ্যৌ পুনর্দ্বৌ চ রোগাঃ ষট্সপ্ততিঃ স্মৃতাঃ |২৯|

View original

वाताद्दश तथा पित्तात् कफाच्चैव त्रयोदश | रक्तात् षोडश विज्ञेयाः सर्वजाः पञ्चविंशतिः ||२८|| तथा बाह्यौ पुनर्द्वौ च रोगाः षट्सप्ततिः स्मृताः |२९|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 20 (29-30) · Śloka 31

হতাধিমন্থো নিমিষো দৃষ্টির্গম্ভীরিকা চ যা ||২৯|| যচ্চ বাতহতং বর্ত্ম ন তে সিধ্যন্তি বাতজাঃ | যাপ্যোঽথ তন্মযঃ কাচঃ সাধ্যাঃ স্যুঃসান্যমারুতাঃ ||৩০|| শুষ্কাক্ষিপাকাধীমন্থস্যন্দমারুতপর্যযাঃ |৩১|

View original

हताधिमन्थो निमिषो दृष्टिर्गम्भीरिका च या ||२९|| यच्च वातहतं वर्त्म न ते सिध्यन्ति वातजाः | याप्योऽथ तन्मयः काचः साध्याः स्युःसान्यमारुताः ||३०|| शुष्काक्षिपाकाधीमन्थस्यन्दमारुतपर्ययाः |३१|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 21 (31-32) · Śloka 33

অসাধ্যো হ্রস্বজাড্যো যো জলস্রাবশ্চ পৈত্তিকঃ ||৩১|| পরিম্লাযী চ নীলশ্চ যাপ্যঃ কাচোঽথ তন্মযঃ | অভিষ্যন্দোঽধিমন্থোঽম্লাধ্যুষিতং শুক্তিকা চ যা ||৩২|| দৃষ্টিঃ পিত্তবিদগ্ধা চ ধূমদর্শী চ সিধ্যতি |৩৩|

View original

असाध्यो ह्रस्वजाड्यो यो जलस्रावश्च पैत्तिकः ||३१|| परिम्लायी च नीलश्च याप्यः काचोऽथ तन्मयः | अभिष्यन्दोऽधिमन्थोऽम्लाध्युषितं शुक्तिका च या ||३२|| दृष्टिः पित्तविदग्धा च धूमदर्शी च सिध्यति |३३|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 22 (33-35) · Śloka 35

অসাধ্যঃ কফজঃ স্রাবো যাপ্যঃ কাচশ্চ তন্মযঃ ||৩৩|| অভিষ্যন্দোঽধিমন্থশ্চ বলাসগ্রথিতং চ যত্ | দৃষ্টিঃ শ্লেষ্মবিদগ্ধা চ পোথক্যো লগণ্শ্চ যঃ ||৩৪|| ক্রিমিগ্রন্থিপরিক্লিন্নবর্ত্মশুক্লার্মপিষ্টকাঃ | শ্লেষ্মোপনাহঃ সাধ্যাস্তু কথিতাঃ শ্লেষ্মজেষু তু ||৩৫||

View original

असाध्यः कफजः स्रावो याप्यः काचश्च तन्मयः ||३३|| अभिष्यन्दोऽधिमन्थश्च बलासग्रथितं च यत् | दृष्टिः श्लेष्मविदग्धा च पोथक्यो लगण्श्च यः ||३४|| क्रिमिग्रन्थिपरिक्लिन्नवर्त्मशुक्लार्मपिष्टकाः | श्लेष्मोपनाहः साध्यास्तु कथिताः श्लेष्मजेषु तु ||३५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 23 (36-38) · Śloka 38

রক্তস্রাবোঽজকাজাতং শোণিতার্শোব্রণান্বিতম্ | শুক্রং ন সাধ্যং কাচশ্চ যাপ্যস্তজ্জঃ প্রকীর্তিতঃ ||৩৬|| মন্থস্যন্দৌ ক্লিষ্টবর্ত্ম হর্ষোত্পাতৌ তথৈব চ | সিরাজাতাঽঞ্জনাখ্যা চ সিরাজালং চ যত্ স্মৃতম্ ||৩৭|| পর্বণ্যথাব্রণং শুক্রং শোণিতার্মার্জুনশ্চ যঃ | এতে সাধ্যা বিকারেষু রক্তজেষু ভবন্তি হি ||৩৮||

View original

रक्तस्रावोऽजकाजातं शोणितार्शोव्रणान्वितम् | शुक्रं न साध्यं काचश्च याप्यस्तज्जः प्रकीर्तितः ||३६|| मन्थस्यन्दौ क्लिष्टवर्त्म हर्षोत्पातौ तथैव च | सिराजाताऽञ्जनाख्या च सिराजालं च यत् स्मृतम् ||३७|| पर्वण्यथाव्रणं शुक्रं शोणितार्मार्जुनश्च यः | एते साध्या विकारेषु रक्तजेषु भवन्ति हि ||३८||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 24 (39-42) · Śloka 42

পূযাস্রাবো নাকুলান্ধ্যমক্ষিপাকাত্যযোঽলজী | অসাধ্যাঃ সর্বজা যাপ্যঃ কাচঃ কোপশ্চ পক্ষ্মণঃ ||৩৯|| বর্ত্মাববন্ধো যো ব্যাধিঃ সিরাসু পিডকা চ যা | প্রস্তার্যর্মাধিমাংসার্ম স্নায্বর্মোত্সঙ্গিনী চ যা ||৪০|| পূযালসশ্চার্বুদং চ শ্যাবকর্দমবর্ত্মনী | তথাঽর্শোবর্ত্ম শুষ্কার্শঃ শর্করাবর্ত্ম যচ্চ বৈ ||৪১|| সশোফশ্চাপ্যশোফশ্চ পাকো বহলবর্ত্ম চ | অক্লিন্নবর্ত্ম কুম্ভীকা বিসবর্ত্ম চ সিধ্যতি ||৪২||

View original

पूयास्रावो नाकुलान्ध्यमक्षिपाकात्ययोऽलजी | असाध्याः सर्वजा याप्यः काचः कोपश्च पक्ष्मणः ||३९|| वर्त्मावबन्धो यो व्याधिः सिरासु पिडका च या | प्रस्तार्यर्माधिमांसार्म स्नाय्वर्मोत्सङ्गिनी च या ||४०|| पूयालसश्चार्बुदं च श्यावकर्दमवर्त्मनी | तथाऽर्शोवर्त्म शुष्कार्शः शर्करावर्त्म यच्च वै ||४१|| सशोफश्चाप्यशोफश्च पाको बहलवर्त्म च | अक्लिन्नवर्त्म कुम्भीका बिसवर्त्म च सिध्यति ||४२||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 25 (43) · Śloka 43

সনিমিত্তোঽনিমিত্তশ্চ দ্বাবসাধ্যৌ তু বাহ্যজৌ |৪৩|

View original

सनिमित्तोऽनिमित्तश्च द्वावसाध्यौ तु बाह्यजौ |४३|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 26 (43) · Śloka 43

ষট্সপ্ততির্বিকারাণামেষা সঙ্গ্রহকীর্তিতা ||৪৩||

View original

षट्सप्ततिर्विकाराणामेषा सङ्ग्रहकीर्तिता ||४३||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 27 (44-45) · Śloka 45

নব সন্ধ্যাশ্রযাস্তেষু বর্ত্মজাস্ত্বেকবিংশতিঃ | শুক্লভাগে দশৈকশ্চ চত্বারঃ কৃষ্ণভাগজাঃ ||৪৪|| সর্বাশ্রযাঃ সপ্তদশ দৃষ্টিজা দ্বাদশৈব তু | বাহ্যজৌ দ্বৌ সমাখ্যাতৌ রোগৌ পরমদারুণৌ | ভূয এতান্ প্রবক্ষ্যামি সঙ্খ্যারূপচিকিত্সিতৈঃ ||৪৫||

View original

नव सन्ध्याश्रयास्तेषु वर्त्मजास्त्वेकविंशतिः | शुक्लभागे दशैकश्च चत्वारः कृष्णभागजाः ||४४|| सर्वाश्रयाः सप्तदश दृष्टिजा द्वादशैव तु | बाह्यजौ द्वौ समाख्यातौ रोगौ परमदारुणौ | भूय एतान् प्रवक्ष्यामि सङ्ख्यारूपचिकित्सितैः ||४५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana puShpikA · Śloka 1

ইতি সুশ্রুতসংহিতাযামুত্তরতন্ত্রান্তর্গতে শালক্যতন্ত্রে ঔপদ্রবিকো নাম প্রথমোঽধ্যাযঃ ||১||

View original

इति सुश्रुतसंहितायामुत्तरतन्त्रान्तर्गते शालक्यतन्त्रे औपद्रविको नाम प्रथमोऽध्यायः ||१||

🔊 Audio coming soon