Skip to content
AYANAAYURVEDAby Dr Vijaya Dwarampudi
Open navigation
Explore AyurvedaBook appointment

28. viparītāviparītavraṇavijñānīyādhyāyaḥ

Adhikarana 1 (1-3) · Śloka 3

অথাতো বিপরীতাবিপরীতব্রণবিজ্ঞানীযমধ্যাযং ব্যাখ্যাস্যামঃ ||১|| যথোবাচ ভগবান্ ধন্বন্তরিঃ ||২|| ফলাগ্নিজলবৃষ্টীনাং পুষ্পধূমাম্বুদা যথা | খ্যাপযন্তি ভবিষ্যত্ত্বং তথা রিষ্টানি পঞ্চতাম্ ||৩||

View original

अथातो विपरीताविपरीतव्रणविज्ञानीयमध्यायं व्याख्यास्यामः ||१|| यथोवाच भगवान् धन्वन्तरिः ||२|| फलाग्निजलवृष्टीनां पुष्पधूमाम्बुदा यथा | ख्यापयन्ति भविष्यत्त्वं तथा रिष्टानि पञ्चताम् ||३||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 2 (4) · Śloka 5

তানি সৌক্ষ্ম্যাত্ প্রমাদাদ্বা তথৈবাশু ব্যতিক্রমাত্ | গৃহ্যন্তে নোদ্গতান্যজ্ঞৈর্মুমূর্ষোর্ন ত্বসম্ভবাত্ ||৪|| ধ্রুবং তু মরণং রিষ্টে... |৫|

View original

तानि सौक्ष्म्यात् प्रमादाद्वा तथैवाशु व्यतिक्रमात् | गृह्यन्ते नोद्गतान्यज्ञैर्मुमूर्षोर्न त्वसम्भवात् ||४|| ध्रुवं तु मरणं रिष्टे... |५|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 3 (5) · Śloka 5

... ব্রাহ্মণৈস্তত্ কিলামলৈঃ | রসাযনতপোজপ্যতত্পরৈর্বা নিবার্যতে ||৫||

View original

... ब्राह्मणैस्तत् किलामलैः | रसायनतपोजप्यतत्परैर्वा निवार्यते ||५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 4 (6) · Śloka 6

নক্ষত্রপীডা বহুধা যথা কালং বিপচ্যতে | তথৈবারিষ্টপাকং চ ব্রুবতে বহবো জনাঃ ||৬||

View original

नक्षत्रपीडा बहुधा यथा कालं विपच्यते | तथैवारिष्टपाकं च ब्रुवते बहवो जनाः ||६||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 5 (7) · Śloka 7

অসিদ্ধিমাপ্নুযাল্লোকে প্রতিকুর্বন্ গতাযুষঃ | অতোঽরিষ্টানি যত্নেন লক্ষযেত্ কুশলো ভিষক্ ||৭||

View original

असिद्धिमाप्नुयाल्लोके प्रतिकुर्वन् गतायुषः | अतोऽरिष्टानि यत्नेन लक्षयेत् कुशलो भिषक् ||७||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 6 (8) · Śloka 8

গন্ধবর্ণরসাদীনাং বিশেষাণাং স্বভাবতঃ | বৈকৃতং যত্ তদাচষ্টে ব্রণিনঃ পক্বলক্ষণম্ ||৮||

View original

गन्धवर्णरसादीनां विशेषाणां स्वभावतः | वैकृतं यत् तदाचष्टे व्रणिनः पक्वलक्षणम् ||८||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 7 (9) · Śloka 10

কটুস্তীক্ষ্ণশ্চ বিস্রশ্চ গন্ধস্তু পবনাদিভিঃ | লোহগন্ধিস্তু রক্তেন ব্যামিশ্রঃ সান্নিপাতিকঃ ||৯|| লাজাতসীতৈলসমাঃ কিঞ্চিদ্বিস্রাশ্চ গন্ধতঃ | জ্ঞেযাঃ প্রকৃতিগন্ধাঃ স্যুঃ ... |১০|

View original

कटुस्तीक्ष्णश्च विस्रश्च गन्धस्तु पवनादिभिः | लोहगन्धिस्तु रक्तेन व्यामिश्रः सान्निपातिकः ||९|| लाजातसीतैलसमाः किञ्चिद्विस्राश्च गन्धतः | ज्ञेयाः प्रकृतिगन्धाः स्युः ... |१०|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 8 (10-12) · Śloka 12

... রতোঽন্যদ্গন্ধবৈকৃতম্ ||১০|| মদ্যাগুর্বাজ্যসুমনাপদ্মচন্দনচম্পকৈঃ | সগন্ধা দিব্যগন্ধাশ্চ মুমূর্ষূণাং ব্রণাঃ স্মৃতাঃ ||১১|| শ্ববাজিমূষিকধ্বাঙ্ক্ষপূতিবল্লূরমত্কুণৈঃ | সগন্ধাঃ পঙ্কগন্ধাশ্চ ভূমিগন্ধাশ্চ গর্হিতাঃ ||১২||

View original

... रतोऽन्यद्गन्धवैकृतम् ||१०|| मद्यागुर्वाज्यसुमनापद्मचन्दनचम्पकैः | सगन्धा दिव्यगन्धाश्च मुमूर्षूणां व्रणाः स्मृताः ||११|| श्ववाजिमूषिकध्वाङ्क्षपूतिवल्लूरमत्कुणैः | सगन्धाः पङ्कगन्धाश्च भूमिगन्धाश्च गर्हिताः ||१२||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 9 (13-15) · Śloka 15

কুঙ্কুমধ্যামকঙ্কুষ্ঠসবর্ণাঃ পিত্তকোপতঃ | ন দহ্যন্তে ন চূষ্যন্তে ভিষক্ তান্ পরিবর্জযেত্ ||১৩|| কণ্ডূমন্তঃ স্থিরাঃ শ্বেতাঃ স্নিগ্ধাঃ কফনিমিত্ততঃ | দূযন্তে বাঽপি দহ্যন্তে ভিষক্ তান্ পরিবর্জযেত্ ||১৪|| কৃষ্ণাস্তু যে তনুস্রাবা বাতজা মর্মতাপিনঃ | স্বল্পামপি ন কুর্বন্তি রুজং তান্ পরিবর্জযেত্ ||১৫||

View original

कुङ्कुमध्यामकङ्कुष्ठसवर्णाः पित्तकोपतः | न दह्यन्ते न चूष्यन्ते भिषक् तान् परिवर्जयेत् ||१३|| कण्डूमन्तः स्थिराः श्वेताः स्निग्धाः कफनिमित्ततः | दूयन्ते वाऽपि दह्यन्ते भिषक् तान् परिवर्जयेत् ||१४|| कृष्णास्तु ये तनुस्रावा वातजा मर्मतापिनः | स्वल्पामपि न कुर्वन्ति रुजं तान् परिवर्जयेत् ||१५||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 10 (16) · Śloka 17

ক্ষ্বেডন্তি ঘুর্ঘুরাযন্তে জ্বলন্তীব চ যে ব্রণাঃ | ত্বঙ্মাংসস্থাশ্চ পবনং সশব্দং বিসৃজন্তি যে ||১৬|| যে চ মর্মস্বসম্ভূতা ভবন্ত্যত্যর্থবেদনাঃ |১৭|

View original

क्ष्वेडन्ति घुर्घुरायन्ते ज्वलन्तीव च ये व्रणाः | त्वङ्मांसस्थाश्च पवनं सशब्दं विसृजन्ति ये ||१६|| ये च मर्मस्वसम्भूता भवन्त्यत्यर्थवेदनाः |१७|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 11 (17) · Śloka 18

দহ্যন্তে চান্তরত্যর্থং বহিঃ শীতাশ্চ যে ব্রণাঃ ||১৭|| দহ্যন্তে বহিরত্যর্থং ভবন্ত্যন্তশ্চ শীতলাঃ |১৮|

View original

दह्यन्ते चान्तरत्यर्थं बहिः शीताश्च ये व्रणाः ||१७|| दह्यन्ते बहिरत्यर्थं भवन्त्यन्तश्च शीतलाः |१८|

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 12 (18-19) · Śloka 19

শক্তিধ্বজরথাঃ কুন্তবাজিবারণগোবৃষাঃ ||১৮|| যেষু চাপ্যবভাসেরন্ প্রাসাদাকৃতযস্তথা | চূর্ণাবকীর্ণা ইব যে ভান্তিচানবচূর্ণিতাঃ ||১৯||

View original

शक्तिध्वजरथाः कुन्तवाजिवारणगोवृषाः ||१८|| येषु चाप्यवभासेरन् प्रासादाकृतयस्तथा | चूर्णावकीर्णा इव ये भान्तिचानवचूर्णिताः ||१९||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 13 (20) · Śloka 20

প্রাণমাংসক্ষযশ্বাসকাসারোচকপীডিতাঃ | প্রবৃদ্ধপূযরুধিরা ব্রণা যেষাং চ মর্মসু ||২০||

View original

प्राणमांसक्षयश्वासकासारोचकपीडिताः | प्रवृद्धपूयरुधिरा व्रणा येषां च मर्मसु ||२०||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana 14 (21) · Śloka 21

ক্রিযাভিঃ সম্যগারব্ধা ন সিদ্ধ্যন্তি চ যে ব্রণাঃ | বর্জযেত্তানপি প্রাজ্ঞঃ সংরক্ষন্নাত্মনো যশঃ ||২১||

View original

क्रियाभिः सम्यगारब्धा न सिद्ध्यन्ति च ये व्रणाः | वर्जयेत्तानपि प्राज्ञः संरक्षन्नात्मनो यशः ||२१||

🔊 Audio coming soon

Adhikarana puShpikA · Śloka 28

ইতি সুশ্রুতসংহিতাযাং সূত্রস্থানে বিপরীতাবিপরীতব্রণবিজ্ঞানীযো নামাষ্টাবিংশতিতমোঽধ্যাযঃ ||২৮||

View original

इति सुश्रुतसंहितायां सूत्रस्थाने विपरीताविपरीतव्रणविज्ञानीयो नामाष्टाविंशतितमोऽध्यायः ||२८||

🔊 Audio coming soon

28. viparītāviparītavraṇavijñānīyādhyāyaḥ — Sushruta Samhita | Ayana Ayurveda | Dr Vijaya Dwarampudi