Adhikarana 1 (1-2) · Śloka 2
অথাতঃ খুড্ডাকচতুষ্পাদমধ্যাযং ব্যাখ্যাস্যামঃ||১|| ইতি হ স্মাহ ভগবানাত্রেযঃ||২||
View original
अथातः खुड्डाकचतुष्पादमध्यायं व्याख्यास्यामः||१|| इति ह स्माह भगवानात्रेयः||२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 1 (1-2) · Śloka 2
অথাতঃ খুড্ডাকচতুষ্পাদমধ্যাযং ব্যাখ্যাস্যামঃ||১|| ইতি হ স্মাহ ভগবানাত্রেযঃ||২||
अथातः खुड्डाकचतुष्पादमध्यायं व्याख्यास्यामः||१|| इति ह स्माह भगवानात्रेयः||२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 2 (3) · Śloka 3
ভিষগ্দ্রব্যাণ্যুপস্থাতা রোগী পাদচতুষ্টযম্| গুণবত্ কারণং জ্ঞেযং বিকারব্যুপশান্তযে||৩||
भिषग्द्रव्याण्युपस्थाता रोगी पादचतुष्टयम्| गुणवत् कारणं ज्ञेयं विकारव्युपशान्तये||३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 3 (4) · Śloka 4
বিকারো ধাতুবৈষম্যং, সাম্যং প্রকৃতিরুচ্যতে| সুখসঞ্জ্ঞকমারোগ্যং, বিকারো দুঃখমেব চ||৪||
विकारो धातुवैषम्यं, साम्यं प्रकृतिरुच्यते| सुखसञ्ज्ञकमारोग्यं, विकारो दुःखमेव च||४||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 4 (5) · Śloka 5
চতুর্ণাং ভিষগাদীনাং শস্তানাং ধাতুবৈকৃতে| প্রবৃত্তির্ধাতুসাম্যার্থা চিকিত্সেত্যভিধীযতে||৫||
चतुर्णां भिषगादीनां शस्तानां धातुवैकृते| प्रवृत्तिर्धातुसाम्यार्था चिकित्सेत्यभिधीयते||५||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 5 (6) · Śloka 6
শ্রুতে পর্যবদাতত্বং বহুশো দৃষ্টকর্মতা| দাক্ষ্যং শৌচমিতি জ্ঞেযং বৈদ্যে গুণচতুষ্টযম্||৬||
श्रुते पर्यवदातत्वं बहुशो दृष्टकर्मता| दाक्ष्यं शौचमिति ज्ञेयं वैद्ये गुणचतुष्टयम्||६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 6 (7) · Śloka 7
বহুতা তত্রযোগ্যত্বমনেকবিধকল্পনা| সম্পচ্চেতি চতুষ্কোঽযং দ্রব্যাণাং গুণ উচ্যতে||৭||
बहुता तत्रयोग्यत्वमनेकविधकल्पना| सम्पच्चेति चतुष्कोऽयं द्रव्याणां गुण उच्यते||७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 7 (8) · Śloka 8
উপচারজ্ঞতা দাক্ষ্যমনুরাগশ্চ ভর্তরি| শৌচং চেতি চতুষ্কোঽযং গুণঃ পরিচরে জনে||৮||
उपचारज्ञता दाक्ष्यमनुरागश्च भर्तरि| शौचं चेति चतुष्कोऽयं गुणः परिचरे जने||८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 8 (9) · Śloka 9
স্মৃতির্নির্দেশকারিত্বমভীরুত্বমথাপি চ| জ্ঞাপকত্বং চ রোগাণামাতুরস্য গুণাঃ স্মৃতাঃ||৯||
स्मृतिर्निर्देशकारित्वमभीरुत्वमथापि च| ज्ञापकत्वं च रोगाणामातुरस्य गुणाः स्मृताः||९||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 9 (10) · Śloka 10
কারণং ষোডশগুণং সিদ্ধৌ পাদচতুষ্টযম্| বিজ্ঞাতা শাসিতা যোক্তা প্রধানং ভিষগত্র তু||১০||
कारणं षोडशगुणं सिद्धौ पादचतुष्टयम्| विज्ञाता शासिता योक्ता प्रधानं भिषगत्र तु||१०||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 10 (11-12) · Śloka 12
পক্তৌ হি কারণং পক্তুর্যথা পাত্রেন্ধনানলাঃ| বিজেতুর্বিজযে ভূমিশ্চমূঃ প্রহরণানি চ||১১|| আতুরাদ্যাস্তথা সিদ্ধৌ পাদাঃ কারণসঞ্জ্ঞিতাঃ| বৈদ্যস্যাতশ্চিকিত্সাযাং প্রধানং কারণং ভিষক্||১২||
पक्तौ हि कारणं पक्तुर्यथा पात्रेन्धनानलाः| विजेतुर्विजये भूमिश्चमूः प्रहरणानि च||११|| आतुराद्यास्तथा सिद्धौ पादाः कारणसञ्ज्ञिताः| वैद्यस्यातश्चिकित्सायां प्रधानं कारणं भिषक्||१२||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 11 (13) · Śloka 13
মৃদ্দণ্ডচক্রসূত্রাদ্যাঃ কুম্ভকারাদৃতে যথা| নাবহন্তি গুণং বৈদ্যাদৃতে পাদত্রযং তথা||১৩||
मृद्दण्डचक्रसूत्राद्याः कुम्भकारादृते यथा| नावहन्ति गुणं वैद्यादृते पादत्रयं तथा||१३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 12 (14) · Śloka 15
গন্ধর্বপুরবন্নাশং যদ্বিকারাঃ সুদারুণাঃ| যান্তি যচ্চেতরে বৃদ্ধিমাশূপাযপ্রতীক্ষিণঃ||১৪|| সতি পাদত্রযে জ্ঞাজ্ঞৌ ভিষজাবত্র কারণম্|১৫|
गन्धर्वपुरवन्नाशं यद्विकाराः सुदारुणाः| यान्ति यच्चेतरे वृद्धिमाशूपायप्रतीक्षिणः||१४|| सति पादत्रये ज्ञाज्ञौ भिषजावत्र कारणम्|१५|
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 13 (15-16) · Śloka 16
বরমাত্মা হুতোঽজ্ঞেন ন চিকিত্সা প্রবর্তিতা||১৫|| পাণিচারাদ্যথাঽচক্ষুরজ্ঞানাদ্ভীতভীতবত্| নৌর্মারুতবশেবাজ্ঞো ভিষক্ চরতি কর্মসু||১৬||
वरमात्मा हुतोऽज्ञेन न चिकित्सा प्रवर्तिता||१५|| पाणिचाराद्यथाऽचक्षुरज्ञानाद्भीतभीतवत्| नौर्मारुतवशेवाज्ञो भिषक् चरति कर्मसु||१६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 14 (17) · Śloka 17
যদৃচ্ছযা সমাপন্নমুত্তার্য নিযতাযুষম্| ভিষঙ্মানী নিহন্ত্যাশু শতান্যনিযতাযুষাম্||১৭||
यदृच्छया समापन्नमुत्तार्य नियतायुषम्| भिषङ्मानी निहन्त्याशु शतान्यनियतायुषाम्||१७||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 15 (18) · Śloka 18
তস্মাচ্ছাস্ত্রেঽর্থবিজ্ঞানে প্রবৃত্তৌ কর্মদর্শনে| ভিষক্ চতুষ্টযে যুক্তঃ প্রাণাভিসর উচ্যতে||১৮||
तस्माच्छास्त्रेऽर्थविज्ञाने प्रवृत्तौ कर्मदर्शने| भिषक् चतुष्टये युक्तः प्राणाभिसर उच्यते||१८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 16 (19-23) · Śloka 23
হেতৌ লিঙ্গে প্রশমনে রোগাণামপুনর্ভবে| জ্ঞানং চতুর্বিধং যস্য স রাজার্হো ভিষক্তমঃ||১৯|| শস্ত্রং শাস্ত্রাণি সলিলং গুণদোষপ্রবৃত্তযে| পাত্রাপেক্ষীণ্যতঃ প্রজ্ঞাং চিকিত্সার্থং বিশোধযেত্||২০|| বিদ্যা বিতর্কো বিজ্ঞানং স্মৃতিস্তত্পরতা ক্রিযা| যস্যৈতে ষড্গুণাস্তস্য ন সাধ্যমতিবর্ততে||২১|| বিদ্যা মতিঃ কর্মদৃষ্টিরভ্যাসঃ সিদ্ধিরাশ্রযঃ| বৈদ্যশব্দাভিনিষ্পত্তাবলমেকৈকমপ্যতঃ||২২|| যস্য ত্বেতে গুণাঃ সর্বে সন্তি বিদ্যাদযঃ শুভাঃ| স বৈদ্যশব্দং সদ্ভূতমর্হন্ প্রাণিসুখপ্রদঃ||২৩||
हेतौ लिङ्गे प्रशमने रोगाणामपुनर्भवे| ज्ञानं चतुर्विधं यस्य स राजार्हो भिषक्तमः||१९|| शस्त्रं शास्त्राणि सलिलं गुणदोषप्रवृत्तये| पात्रापेक्षीण्यतः प्रज्ञां चिकित्सार्थं विशोधयेत्||२०|| विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया| यस्यैते षड्गुणास्तस्य न साध्यमतिवर्तते||२१|| विद्या मतिः कर्मदृष्टिरभ्यासः सिद्धिराश्रयः| वैद्यशब्दाभिनिष्पत्तावलमेकैकमप्यतः||२२|| यस्य त्वेते गुणाः सर्वे सन्ति विद्यादयः शुभाः| स वैद्यशब्दं सद्भूतमर्हन् प्राणिसुखप्रदः||२३||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 17 (24-25) · Śloka 25
শাস্ত্রং জ্যোতিঃ প্রকাশার্থং দর্শনং বুদ্ধিরাত্মনঃ| তাভ্যাং ভিষক্ সুযুক্তাভ্যাং চিকিত্সন্নাপরাধ্যতি||২৪|| চিকিত্সিতে ত্রযঃ পাদা যস্মাদ্বৈদ্যব্যপাশ্রযঃ| তস্মাত্ প্রযত্নমাতিষ্ঠেদ্ভিষক্ স্বগুণসম্পদি||২৫||
शास्त्रं ज्योतिः प्रकाशार्थं दर्शनं बुद्धिरात्मनः| ताभ्यां भिषक् सुयुक्ताभ्यां चिकित्सन्नापराध्यति||२४|| चिकित्सिते त्रयः पादा यस्माद्वैद्यव्यपाश्रयः| तस्मात् प्रयत्नमातिष्ठेद्भिषक् स्वगुणसम्पदि||२५||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 18 (26) · Śloka 26
মৈত্রী কারুণ্যমার্তেষু শক্যে প্রীতিরুপেক্ষণম্| প্রকৃতিস্থেষু ভূতেষু বৈদ্যবৃত্তিশ্চতুর্বিধেতি||২৬||
मैत्री कारुण्यमार्तेषु शक्ये प्रीतिरुपेक्षणम्| प्रकृतिस्थेषु भूतेषु वैद्यवृत्तिश्चतुर्विधेति||२६||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana 19 (27-28) · Śloka 28
তত্র শ্লোকৌ- ভিষগ্জিতং চতুষ্পাদং পাদঃ পাদশ্চতুর্গুণঃ| ভিষক্ প্রধানং পাদেভ্যো যস্মাদ্বৈদ্যস্তু যদ্গুণঃ||২৭|| জ্ঞানানি বুদ্ধির্ব্রাহ্মী চ ভিষজাং যা চতুর্বিধা| সর্বমেতচ্চতুষ্পাদে খুড্ডাকে সম্প্রকাশিতমিতি||২৮||
तत्र श्लोकौ- भिषग्जितं चतुष्पादं पादः पादश्चतुर्गुणः| भिषक् प्रधानं पादेभ्यो यस्माद्वैद्यस्तु यद्गुणः||२७|| ज्ञानानि बुद्धिर्ब्राह्मी च भिषजां या चतुर्विधा| सर्वमेतच्चतुष्पादे खुड्डाके सम्प्रकाशितमिति||२८||
🔊 Audio coming soon
Adhikarana puShpikA · Śloka 9
ইত্যগ্নিবেশকৃতে তন্ত্রে চরকপ্রতিসংস্কৃতে শ্লোকস্থানে খুড্ডাকচতুষ্পাদো নাম নবমোঽধ্যাযঃ||৯||
इत्यग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते श्लोकस्थाने खुड्डाकचतुष्पादो नाम नवमोऽध्यायः||९||
🔊 Audio coming soon